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ॐ-निवेदन-ॐ
चारो
वेद,
अठारहो
पुराण,
अनेको
उपनिषदों,अबतक
के विभिन्न
वैज्ञानिक
चिन्तनों में
जो वर्णित है
तथा जो कुछ अन्यत्र
भी उपलब्ध है
वो मैं अपनी
बुद्धि के अनुसार
मैं अपने अंतःकरण
के सुख के लिये
आपके समक्ष
सामान्य भाषा
में प्रस्तुत
कर रहा हूँi
मुझे
अलंकारिक भाषा
का भी उचित ज्ञान
नहीं है। मुझे
यह पूर्ण विश्वास
है कि सज्जन
(विवेकी
जन)
मेरी
अज्ञानता की
अनदेखी करते
हुए मेरे प्रयास
में अपने प्रयास
को सामिल करके
मेरे उदेश्य
को सफल करने में
अवश्य सुख का
अनुभव करेगें।
वेद-विद्या
भारतीय संस्कृति
का पहला प्रतीक
है।वेद्यतेऽनेनेति
वेदः अर्थात
इससे सब कुछ
जाना जाता है,
इसलिये
इसे वेद कहते
हैं। अतः वेद
का अर्थ है ज्ञान।
ब्रह्म
क्या है?
जीव
क्या है?
आत्मा
क्या है?
ब्रह्मांण्ड
की उत्पत्ति
कैसे हुई है?
इन
सभी बिंन्दुओं
पर विस्त्रित
व्याख्या हमारे
वेदों
में भरी
पडी़ है। सम्पूर्ण
पिण्ड-ब्रह्माण्ड
और परमात्मा
को जानने का
विज्ञान ही वेद
है। वेद मानव
सभ्यता,भारतीय
संस्कृति के
मूल श्रोत हैं।
इनमें मानव-जीवन
के लौकिक एवं
पारलौकिक उन्नति
के लिये उपयोगी
सभी सिद्धान्तों
एवं उपदेशों
का अद्भुत वर्णन
है। वेद ज्ञान
का अनन्त श्रोत
है। कदाचित्
सम्पूर्ण ज्ञान
की अविरल धारा
वेदों से ही
प्रवाहित होकर
लोक कल्याण का
कारणबनी
है।ऋग्वेद,यजुर्वेद,सामवेद
तथा अथर्ववेद
की ऋचाओं में
न जाने कितने
वैज्ञानिकअनुसंधानों
का निचोड़ समाया
है।न जाने कितने
अनुसंधान आज
वेदों में समाये
इस असीम ज्ञान
के परिपेक्ष्य
में हो रहे हैं।
वेद एक प्रकार
से मंत्र का
विज्ञान है
जिसमें विराट्
विश्व ब्रह्मांड
कीउन अलौकिक
शूक्ष्म एवं
चेतन सत्ताओं
एवं शक्तियों
तक से सम्बन्ध
स्थापित करने
करने के गूढ़
रहस्य दिये हुये
है। भौतिक विज्ञानी
अभी तक इस क्षेत्र
में मामुली सी
जानकारी ही
प्राप्त कर सके
हैं। यह वेबसाइट
वेदों में समाहित
इन्हीं वैज्ञानिक
अनुसंधानों
को उजागर करने
का प्रयास मात्र
है।वेबसाइट
बनाने का उदेश्य
यह भी है कि समस्त
मानवजाति अपने
पूर्वजो द्वारा
चाहे वो किसी
धर्म,
जाति,
देश
के रहे हों,के
अथक परिश्रम,
वैज्ञानिक
चिन्तन,अनुभवो
,प्रयासों
पर जो कि उनके
द्वारा आगे आने
वाली पीढ़ियों
के सुख-शान्ति
,सम्पन्न
,स्वस्थ
जीवन बिताने
एवं पूरे विश्व
का कल्याण करने
के पथ पर अग्रसर
होते रहने के
उदेश्य से किये
गये हैं,पर
मानव-समाज
की चेतना को
जाग्रत करके
इसपर चर्चा-परिचरचा
करके सम्पूर्ण
विश्व में सुख
शान्ति का मार्ग
ढ़ूढ़ने के लिये
प्रेरित करना
एवं उत्साहित
करना है। कदाचित्
सुधीजनों का
सहयोग इसकी
सार्थकता को
प्रमाणिक स्वरूप
दे सके।
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